तालाब की बातें

तालाब की बातें
जल है तो जीवन है

बुधवार, 7 जून 2017

Terrorism trying to enter in Punjab again

भारी पड़ सकती है पंजाब की अनदेखी
पंकज चतुर्वेदी
आपरेषन ब्लू स्टार की 33वी बरसी पर पंजाब के कई अखबारों में विज्ञापन छपे, भिंडरावाले के फोटो वाले विज्ञापन। फिर हरमिंदर साहिब में कुछ लोगों ने पृथक खालिस्तान राश्ट्र के समर्थन में नार लगा दिए। यह हमारी आतंकवाद-विरोधी नीति के साथ मजाक है कि देष में मुस्लिम के अलावा अन्य किसी को आतंकवादी माना नहीं जाता। अफजल गुरू की फांसी पर एक कौम या राज्य को कटघरे में खड़ा किया जाता है लेकिन सुप्रीेम कोर्ट से सजा पाए भूल्लर के मामले में सहानुभूति की बात होती है। कष्मीर में पाकिस्तान और आईएसआई का खेल खुल गया तो वे एक बार फिर अपने पुराने ठिकाने को टटोलने लगे। कैसी विउंबना है कि जो कनाड़ा कभी भारत की आजादी के संषस्त्र संघर्श ‘‘गदर आंदोलन’’ का केंद्र रहा, वहां आज कुछ सिख परिवार भारत के ही खिलाफ साजिषों को गढ़ रहे हैं। लोग भले नहीं होंगे कि कुछ महीनों पहले देष की सबसे सुरक्षित माने जाने वाली जेल में कई साल से समानांतर चल रही दुनिया का खुलासा हुआ था, जहां अपराधी फेसबुक पर पोस्ट लगा कर धमकियां दे रहे थे, खालिस्तान लिबरेषन फोर्स का मुखिया स्काईप पर पाकिस्तान बात करता था। यह अकेले एक जेल के हालात नहीं थे, राज्य में वे सभी जेल जहां जमींदोज हो चुके खालिस्तान अंादोलन से जुड़़े लेाग बंद थे, वहां हालात ऐसे ही थे। राज्य में सरकार बदलने के बाद हालात भी बदले और धीरे-धीरे सामने आने लगा कि किस तरह अकाली अपनी तयषुदा हर से बचने के लिए खाड़कुओं को षह दे रहे थे। यही नहीं सतलुज-यमुना लिंक विवाद के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद छोटे-छोटे गांव में इसे सिखों के साथ अन्याय व अलग देष की मांग एकमात्र हल जैसी सभाएं हुई, जिसे सरकार नजरअंदाज करती रही।

यही नहीं खलिस्तान लिबरेषन फोर्स के प्रमुख हरमिंदर सिंह के भागने व अचानक दिल्ली में रेलवे स्टेषन पर पकड़े जाने पर भी सवालिया निषान है। समझा जा रहा है कि असल में यह साजिष का ही हिस्सा था कि बूढे, बेकार हो गए आतंकी को पकड़वा कर पुलिस की पीठ भी थपथ्पाा ला जाए और असल में जिन्हे छूमंतर होना था, वे हो भी जाएं।
सनद रहे पंजाब में बड़े बदमाष या गिरोहबाज थेाडे दिनों बाद खुद को खाड़कू कहने लगते हैं। और ऐसे गिरोहों को पाकस्तिान के एजेंट अपना मोहरा बना लेते है।। विडंबना है कि हमारे देष के राश्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार कभी पंजबा में आतंकवाद विरोधी मुहिम के विषेशज्ञ माने जाते थें और आज सुलगते पंजाब का अनदेखी की जा रही है।
पिछले साल पंजाब के पठानकोट के अकालगढ में वायु सेना के षिविर पर हुए आतंकंी हमले को ले कर कई बातें हवा में उड़ती रही और वहां मारे गए आतंकियों की पहचान अभी तक उजागर नहीं की गई। पूरे मामले में एक वरिश्ठ पुलिस अफसर की संदिग्ध भूमिका पर अभी भी षंकाओं के बादल छाए है, जिसकी गाड़ी ले कर आतंकी वायु सेना अड्डे तक पहुंचे थे। इस घटना के बाद मई में पंजाब की खुफिया एजेंसी ने एक रपट केंद्र को भेजी थी, जिसमें बताया गया था कि कनाड़ा में ब्रिटिष कोलंबिया के ‘‘मिषन सिटी’’ में पंजाब से भगोड़ा घोशित आतंकी हरदीप निज्जर खालिस्तान टेरर फोर्स के नाम से संगठन चला रहा है। जहां भारत के खिलाफ जहर उगलने व हथियारों की ट्रैनिंग भी दी जा रही है। रिपोर्ट में पाकसितान के रास्ते हथियार आने की भी चेतावनी थी। उधर खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स के रंजीत सिंह नीता द्वारा पाकिस्तान में हिजबुल आतंकियों को सिख धर्म, परंपरा, गुरूमुखी, पंजाब के रास्तों, जंगलों का प्रषिक्षण देने के भी  प्रमाण सरकार के पास हैं।
अभी एक साल पहले ही पाकिस्तान की सीमा के करीबी फरीदकोट जिले के बरगड़ी गांव में पवित्र ग्रंथ श्री गुरूग्रंथ सहिब के 110 पन्ने कटे-फटे हालात में सड़कों पर मिले। बताया गया कि यह पन्ने जून महीने में बुर्ज जवाहर सिंह गांव के गुरूद्वारे से चोरी किए गए ग्रंथ साहेब के थे। उसके बाद कोई दो दषक बाद  वहां इतनी बड़ी संख्या में अर्धसैनिक बलों को उतारना पड़ा था। यही नहीं पंजाब की आग अब पडोसी राज्य हरियाणा तक फैल गई है। 23 अक्तूबर को सिरसा, अंबाला सहित कई जिलों में बंद व जुलूस निकाले गए जिससे जीटी रोड ठप रही । उस समय भी पंजाब पुलिस ने कहा था कि मसला और भी गंभीर है क्योंकि इस पूरे उपद्रव के तार दूर देषों से जुड़े हैं। पुलिस का दावा था कि पंजाब के पांच जिलों में कुछ संदिग्ध लेागों के पास विदेष से खूब पैसा आया था।
यही नहीं पिछले साल जून में ही खालिस्तान समर्थकों ने खूब सिर उठाया था, ब्लू स्टार की बरसी के नाम पर जगह-जगह जलसे हुए थे। सटे हुए जम्मू में तो कई दिन कफ्र्यु लगाना पड़ा था क्योंकि वहां पुलिस से भिडंत में कई मौत हुई थीं। जून महीने के आसपास ही मनिंदरजीत सिंह बिट्टा की हत्या के लिए बम फोड़कर नौ लोगों की हत्या के अपराधी देवेन्द्रपाल सिंह भुल्ल्र को दिल्ली की तिहाड़ जेल से तबादला करवा कर अमृतसर बुलाया गया और वहां एक अस्पताल में एसी कमरे में रखा गया।
यह किसी से छिपा नहीं है कि हारनेे के बाद अकाली काफी कुछ पंथिक एजेंडे की ओर मुड़ गए हैं और केंद्र सरकार में साझेदार होने के कारण एनकी हरकतों को नजरअंदाज किया जाता है। बेहतर आर्थिक स्थिति के मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ने वाले पंजाब राज्य में आतंकवादियों पर नरम रवैया तथा अफवाहों का बाजार भी उतना ही तेजी से विकसित हो रहा है, जितनी वहां की समृद्धता । ऐसी सच्ची-झूठी खबरें लोगों के बीच भ्रम, डर व आषंकाएं पैदा कर रही हैं, आम जन-जीवन को प्रभावित कर रही हैं और कई बार भगदड़ के हालात निर्मित कर रही हैं । विडंबना है कि बेसिर पैर की इन लफ्फाजियों के पीछे असली मकसद को पता करने में सरकार व समाज दोनो ही असफल रहे हैं । यह जीवट, लगन और कर्मठता पंजाब की ही हो सकती है, जहां के लोगों ने खून-खराबे के दौर से बाहर निकल कर राज्य के विकास के मार्ग को चुना व उसे ताकतवर बनाया । बीते एक दशक के दौरान पंजाब के गांवों-गांवों तक विकास की धारा बही है । संचार तकनीक के सभी अत्याधुनिक साधन वहां जन-जन तक पहुंचे हैं, पिछले कुछ सालों में यही माध्यम वहां के अफवाहों का वाहक बना है ।
फेसबुक या गूगल पर खोज करें तो खालिस्तान, बब्बर खालसा, भिंडरावाले जैसे नामों पर कई सौ पेज वबेसाईट उपलब्ध हैं। इनमें से अधिकांष विदेषों से संचालित है। व कई एक पर टिप्पणी करने व समर्थन करने वाले पाकिस्तान के हैं। यह बात चुनावी मुद्दा बन कर कुछ हलकी कर दी गई थी कि पंजाब में बड़ी मात्रा में मादक दवाओं  की तस्करी की जा रही है व युवा पीढ़ी को बड़ी चालाकी से नषे के संजाल में फंसाया जा रहा है। सारी दुनिया में आतंकवाद अफीम व ऐसे ही नषीले पदार्थों की अर्थ व्यवस्था पर सवार हो कर परवान चढा हे। पंजाब में बीते दो सालें में कई सौ करोड़ की हेरोईन जब्त की गई है व उसमें से अधिकांष की आवक पाकिस्तान से ही हुई। स्थानीय प्रषासन ने इसे षायद महज तस्करी का मामला मान कर कुछ गिरफ्तारियों के साथ अपनी जांच की इतिश्री समझ ली, हकीकत में ये सभी मामले राज्य की फिजा को खराब करने का प्रयास रहे हैं।
अभी 31 मई को बठिंडा पुलिस ने एक महिला सहित चार ऐसे खलिस्तानी आतंकियो को हथियार सहित पकड़ा था जो कि दिल्ली में सज्जन कुमार और टाईटलर की हत्या करना चाहते थे। उनके भी तार कनाड़ा से जुड़े मिले हैं। जरा कुछ पीछे ही जाएं, सितंबर- 2014 में बब्बर खालसा का सन 2013 तक अध्यक्ष रहा व बीते कई दषकों से पाकिस्तान में अपना घर बनाएं रतनदीप सिंह की गिरफ्तारी पंजाब पुलिस ने की। उसके बाद  जनवंबर- 14 में ही दिल्ली हवाई अड्डे से खलिस्तान लिबरेषन फोर्स के प्रमुख हरमिंदर सिंह उर्फ मिंटू को एक साथी के साथ गिरफ्तार किया गया। ये लेाग थाईलैंड से आ रहे थे। यही मिंटू नाभा जेल से भागा व दिल्ली में 27 नवंबर को ही पकड़ लिया गया। पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में सजायाफ्ता व  सन 2004 में अतिसुरक्षित कहे जाने वाली चंडीगढ की बुढैल जेल से सुरंग बना कर फरार हुए जगतार सिंह तारा को जनवरी-2015 में थाईलैंड से पकड़ा गया। एक साथ विदेषों में रह कर खालिस्तानी आंदोलन को जिंदा रखने वाले षीर्श आतंकवादियों के भारत आने व गिरफ्तार होने पर भले ही सुरक्षा एजेंसिंयां अपनी पीठ ठोक रही हों, हकीकत तो यह है कि यह उन लोगों का भारत में आ कर अपने नेटवर्क विस्तार देने की येाजना का अंग था। भारत में जेल अपराधियों के लिए सुरक्षित अरामगाह व साजिषों के लिए निरापद स्थल रही है। रही बची कसर जनवरी-15 में ही राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाष सिंह बादल ने 13 कुख्यात सजा पाए आतंकवादियों को समय से पहले रिहा करने की मांग कर दी थी जिसमें जगतार सिंह तारा भी एक था। कुल मिला कर देखे तो जहां एक तरफ राज्य सरकार पंथक एजेंडे की ओर लौटती दिख रही है तो इलाके में मादक पदार्थों की तस्करी की जड़ तक जाने के प्रयास नहीं हो रहे हैं।
यह कैसी विडंबना है कि पंजाब के अखबारों में षहीदी समागम के नाम पर करोड़ांे के विज्ञापन दिए जाते हैं और सरकार इस पर मौन रहती है। फिर ऐसे में दो दशक पहले तक संवेदनशील रहे सीमावर्ती राज्य को ले कर केंद्र सरकार का आंखें मूंदे रखना कहीं कोई गंभीर परिणाम भी दे सकता है ।

पंकज चतुर्वेदी



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