तालाब की बातें

तालाब की बातें
जल है तो जीवन है

गुरुवार, 9 जनवरी 2014

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पंकज चतुर्वेदी
(प्रसिद्ध बाल कथाकार)
 
पंकज चतुर्वेदी हिंदी के प्रसिद्ध लेखक हैं। वह बच्चों के लिए तो लिखते ही हैं, या यूं कहिए वह बाल मन के विशेषज्ञ हैं, परंतु बड़ों के लिए, खास तौर पर देश की ज्वलंत समस्याओं पर भी उनकी लेखनी का पैनापन सबको अपना बना लेने की क्षमता रखता है। शायद ही कोई अखबार हो, जिसके पृष्ठों पर पंकज की कभी न कभी नजर न आते हों।

पंकज चतुर्वेदी का जन्म 11 दिसंबर 1963 को मध्यप्रदेश के झबुआ में हुआ। उनके पिता श्री विद्यासागर चतुर्वेदी संस्कृत के प्रकांड विद्वान होने के साथ-साथ अर्थशास्त्र और अंग्रेजी में एमए थे। मां भी उस जमाने की ग्रेजुएट हैं, जब लोग अपने घर की महिलाओं को घर में बंद रखना पसंद करते थे। विद्यासागर चतुर्वेदी मध्यप्रदेश सरकार की नौकरी में थे।
चूकि परिवार पढ़ा-लिखा था, अत: पंकज चतुर्वेदी को शुरू से ही पढऩे लिखने का माहौल मिला।
रतलाम के जावरा के एम जी हाई स्कूल से पढ़ाई के बाद उन्होंने महाराजा कॉलेज छतरपुर से मैथ्स में एम. एससी किया। स्कूल कॉलेज के दिनों में एनसीसी में भी सक्रिय रहे और उन्हें इसमें 'एÓ सर्टिफिकेट हासिल है।
पंकज कॉलेज के दिनों से ही लिखने लगे थे। उनकी पहली नियुक्ति स्वामी परवानंद डिग्री कॉलेज छतरपुर (मध्यप्रदेश) में सहायक प्राध्यापक की थी। वहीं से वह डेपुटेशन पर जिला साक्षरता समिति में जिला समन्वयक के पद पर चले गए। हालाकि यह कार्य प्रौढ़ के लिए था। पर साक्षरता अभियान का मतलब ही है आरंभ से पढ़ाई की शुरुआत कराना, यानी बड़े भी पढ़ते समय किसी बच्चे की तरह ही होते हैं। पंकज जी के अनुसार शायद तभी से उनके मन में बच्चों के लिए कुछ करने की इच्छा जागी। उनका ध्यान बच्चों के लिए लिखने की ओर आकर्षित करने का श्रेय गुरबचन सिंह जी को भी जाता है जो टीकमगढ़ में बाल साहित्य केंद्र चलाते थे। उन्होंने डिग्री कॉलेज छतरपुर (मध्यप्रदेश) में गणित के एसिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में साढ़े सात वर्षों तक अध्यापन का कार्य किया।
बच्चों से पंकज का जुड़ाव और प्रगाढ़ तब हुआ, जब वह नेशनल बुक ट्रस्ट से जुड़े। वह 5 जुलाई 1994 का दिन था, जब पंकज ने नेशनल बुक ट्रस्ट में नौकरी शुरु की। मजेदार बात यह है कि कॉलेज के दिनों का उनके अनुभव को देखते हुए यहां भी उन्हें पहले प्रौढ़ शिक्षा से ही जोड़ा गया। उनका विधिवत बाल साहित्य से जुड़ाव 1996 में हुआ जब उनकी नियुक्ति नेशनल बुक ट्रस्ट के राष्ट्रीय बाल साहित्य केंद्र में हुई। उन्होंने ही वहां पाठक मंच बुलेटिन की नींव डाली। बाल पुस्तक मेलों के आयोजन में पहल की।
आज वह नेशनल बुक ट्रस्ट में सहायक संपादक के पद पर हैं। वह पुस्तकों को बच्चों तक पहुंचाने के लिए एनबीटी द्वारा लगाए जाने वाले पुस्तक मेलों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
प्रसाशक के रूप मे

नेशनल बुक ट्रस्ट में होने के कारण वह शायद पूरे देश में और विदेश में भी पुस्तक मेले के आयोजन के सिलसिले में घूम चुके हैं। बच्चों की रुचि पर उनकी अच्छी और गहरी पकड़ है। अपने काम से अलग वह लिखने को भी पर्याप्त समय देते हैं। अब तक उनकी दो दर्जन से ज्यादा बाल पुस्तकें आ चुकी हैं। वह बच्चों के लिए बड़ी और क्लिष्ट भाषा की पुस्तकों के पक्ष में नहीं हैं। उनके अनुसार बच्चों को छोटी और सार्थक पुस्तकें चाहिएं जो उनके विकास में सहायक हों।

पंकज जी की पुस्तकें (उपन्यास और कहानियां)

1. खुशी
2. मैं भी कुछ करूं
3. यह मैं हूं
4. चंदा और खरगोश
5. रिमझिम
6. बस्ते से बाहर
7. साईकिल वाले भैया
8. ठगा गया राजा
9. ग्रामीण क्षेत्रों में यातायात
10. हैंडपंप की देखभाल
11. गोबर से सोना
12. बेर का पेड़
13. हमारे उपग्रह
14. कड़वी मिठास
15. भूत धुलाई केंद्र
16. भोंदू
17. नमक की खेती
18. पालतू पशुओं की देखभाल
19. ढेर सारे दोस्त
20. दूर की दोस्ती
21. कहां गए कुत्ते के सींग
22. लो गरमी आ गई
23. पहिया
24. पहिया और अन्य कहानियां
इसके अलावा पंकज चतुर्वेदी ने बहुत सी पुस्तकों का संपादन और अनुवाद किया है।

पंकज चतुर्वेदी
सहायक संपादक
नेशनल बुक ट्रस्ट
5 नेहरू भवन, वसंत कुंज इंस्टिट्यूशनल एरिया-२
नई दिल्ली-110070
फोन (घर) 0120-4241060
फोन(आ.) 011-26707758
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