https://www.youtube.com/watch?v=9W6WrShqKGE
अभी अभी बीबीसी की पूरी फिल्म 'इंडियाज डॉटर' देखी, लगभग एक घंटे की ,
शानदार डाक्यूमेंट्री है, इसमें मुकेश व उसके वकील एपी सिंह व शर्मा के
बयान बताते हैं कि किस तरह एक कानून इंसान की मनासकिता को नहीं बदल सकता और
वे मुकेश के अलावा वे दो पढे लखिे जानवर हैं , वहीं जस्टिज लीला सेठ,
गोपाल सुब्रहण्यम, शीला दीक्षित, आमोद कंठ के बयान गौर करने लायक हैं,
सबसे ज्यादा मामर्कि, दार्शनिक व मन को छूने वाले बयान ज्योति यानि
नर्भिया के पिता के हैं, उनके शब्द शायद किसी अपराधी का दिल बदलने
की ताकत रखते हैं, यह दुर्भाग्य है कि हमारे राजनेता बगैर तथ्यों को
जाने पहचाने कुछ भी बयान या फैसले ले लेते हैंा फिल्म के अधिकांश फुटेज
पहले ही प्रसारित हो चुके हैं बस मुकेश अपराधी के फुटेज ही नए हैं मेरा
अपना नजरिया है कि यह फल्म व्यापक तौर पर दखिाई जाना चाहिए ताकि आम लोगों
को एक अपराधी व एक बाप की मानसिसकता में भेद देखने को मिले इसमें ऐस कुछ
भी नहीं है जो किसी अपीलीय मुकदमें में तथ्यों के तौर पर पेश किया जाए, यह
डाक्यूमेंट्री मुल्क में बच्चियों के साथ असमानता व भेदभाव का आईना है
और जब तक इस हकीकत को हम स्वीकार नहीं करेंगे , उसके निराकरण के लिए तैयार
नहीं होंगे , बेहतरीन फिल्म के लिए लेसली उडविन को बधाई तथा बगैर फिल्म
को देखे संसद में झूठा गुस्सा दिखा कर अगले ही पल दांत दखिाकर होली
खेलने वाले मानननीयों को भी एक बार फिर विचार करना चाहिएा इसे जरूर देखें
यूट्रयूब पर आसानी से उपलब्ध है। एक बात और इस फ़िल्म की शुरुआत काली
स्क्रीन पर इस सन्देश से होती हे कि इस फ़िल्म को भारत सरकार की अदालत ने पाबंदी लगा
दी है। इससे पुरे विश्व में सन्देश गया कि भारत में बेटा बेटी में भेद होता
है और उस पर सरकार पाबंदी की मोहर लगाती है।
My writings can be read here मेरे लेख मेरे विचार, Awarded By ABP News As best Blogger Award-2014 एबीपी न्यूज द्वारा हिंदी दिवस पर पर श्रेष्ठ ब्लाॅग के पुरस्कार से सम्मानित
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