रेगिस्तान
में पानी की कमी तो है ही। अबूधाबी में सड़क के किनारे खूब हरियाली है।
यहां सीवर के पुनरशोधित जल को पतले पतले पाईप के जरिये पेड़ पौधों की जड़ में
पहुंचाया जाता है। निश्चित समय पर पम्प चलता है और हरियाली को पानी से
जीवन मिल जाता है। दिल्ली में टेंकर के मोटे पाईप से सींचा जाता है। उसमें
आधा पानी फ़ैल कर बेकार जाता है। फिर पांच आदमी, टेंकर के धुएं व् उससे उपजे
जाम का प्रदुषण। कम लागत में, किफायती सलीका। हाँ यहां पॉइप चोरी होने का
कोई खतरा नहीं होता। सड़क पर कहीं पुलिस नहीं दिखती। केमरे से निरीक्षण ,कड़े
क़ानून का डर और उससे उपजा आत्म अनुशासन। पानी व् पौधे दोनों सहेजता है।
My writings can be read here मेरे लेख मेरे विचार, Awarded By ABP News As best Blogger Award-2014 एबीपी न्यूज द्वारा हिंदी दिवस पर पर श्रेष्ठ ब्लाॅग के पुरस्कार से सम्मानित
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