तालाब की बातें

तालाब की बातें
जल है तो जीवन है

बुधवार, 4 मई 2016

My tour to Abu Dhabi 26 April-04 May

03 May 2016




आज दुनिया के सबसे महंगे होटल 'द एमेरेट पेलेस'' गया. यह एक सात सितारा होटल है और अबुधाबी सरकार का शासकीय अतिथि गृह भी. समु्रद तअ पर लगभग 85 हैक्‍टेयर में फैले इस शानदार महल के आंगन में हेलीकाप्‍टर भी उतर जाते हैं. इसका निर्माण सन 2001 में शुरू हुआ था. लगभग तीन बिलयिन अमंरिकी डालर खर्च कर यह चार साल में पूरा हुआ, इसका आर्किटक्‍ट डिजाईन मशहूर WATG यानि बिंबरले, एलीजन टॉग एंड गूस कपंनी ने तैयार किया था, यह होटल सन 2005 में शुरू हुआ .यहां कोरल, पर्ल और डायमंड केटेगरी के 302 कमरे हैं, जिनका किराया 179 से ले कर 325 डालर तक है .कमरे की बालकनी में शानदीर बगीचा है और उससे समुद्र सामने दखिता हैा, 114 गुंबद, 200 फव्‍वारे 14 रेस्‍तरां वाला यह होटल हुआ. यहां की हरियाली, कला देखने लायग हैा इसके ठीक सामने हयात जैसे दो तीन होटल हैं दो एत्‍तेहाद टावर है, कई आलीशान भव हैं इलाके में शेख लोगों के आलीशान मकान बेहद आकर्शक हैं यहां कुछ फोटो होटल के बाहर के हैं व कुछ भीतर के रेस्‍त्‍रा वाले इलाके सेभीतर के फोटो खींचने की अनुमति नहीं
है
Pankaj Chaturvedi's photo.
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PUBLIC TRANSPORT AND TAXIES IN ABU DHABI 
अबुधाबी में सार्वजनिक परिवहन की दो ही व्‍यवस्‍था हैं, बस या फिर टैक्‍सी. पहले चर्चा बस की, यहां बस बेहद सस्‍ती है,दो देहरम में शहर में कही भी जा सकते हो, बस बस के नंबर व रूट पता हों, हालांकि बस पर अं्रेेजी में आखिरी मुकाम का नाम लखिा होता है, लेकिन उस रूट के बांकी स्‍टापेज नहीं, सो यह स्‍थानीय लोगों के उपयोगी है, बढिया लो फ्लोर वाली एसी बसें. यदि अबुधाबी से दुबई जाना हो तो बुर्ज खलीफा तक का टैक्‍सी का बिल कम से कम 270 दिहरम होगा, जबकि बस महज 25 दिहरम में पहुंचा देगीा
टैक्‍सी व्‍यवस्‍था शानदार, सुरक्षित व बगैर धोखाधडी की हैा यहां छह कंपयिों की गाडियां चलती हैं लेकिन उन सभी का नियंत्रण स्‍थानीय म्‍यूनिस्‍पल के पास हैा सभी कंपनियों का किराया, कानून एक ही हैं सवारी के लिए और चालक के लिए भी . सभी गाडिया टोयटा की केमरी हैं सभी का रंग स्‍लेटी है, सभी में ड्ायवर के करीब डेश बोड पर बडी सी तख्‍ती होती है जिसमें ड्ायवर का नाम व फोटो अ्रंग्रेजी में होता है. यहीं पर दखिता रहता है कि आपका बिल कितना हुआ, सवारी के बैठते ही चालक एक लीवर दबाता है व मीटर शुरू और उतरते ही कंप्‍यूटरीरक़त बिल आ जाता है, यहां छुट्रटा वापिस ना करना या टिप देने की कतई रिवाज नहीं हैं , अधिकांश ्ड्रायवर नेपाली, पाकिस्‍तानी व बांग्‍लादेशी हैं जों हिंदी अच्‍छी तरह बोलते व समझते हैं.
यहां ड्रायविंग लाईसेंस पाना तो कठिन है ही, उससे भी जटिल है टैक्‍सी चलाने का परमिट पाना. इसके लिए लिखित परीक्षा होती है, वह भी आनलाईन जिसमें अरबी, अंग्रेजी भाषा का ज्ञान, रास्‍तों की जानकारी, चिन्‍हों को पहचानना आदि में 90 फीसदी से ज्‍यादा अंक पाना जरूरी होता है.
ड्रायवर को कंपनी आठ सौ दिहरम मासिक का वेतन और कुल चले मीटर पर कमीशन देती है, यदि कंपनी के पास गाडी ना हो या फिर ड्रायवर साल में एक बार एक महीने को घर जाना चाहता हो तो भी उसका वेतन मिलता है. ड्रायवर को मेडिकल बीमा की सुवधिा कंपनी देती है जिसका प्रीमियम कंपनी ही भरती है. ड्रायवर किसी भी बउे अस्‍पताल में जा कर भर्ती या इलाज करवा सकता है, बस दवा के 30 फीसदी देने होते हैं इतनी ुसवधिा पर कडा अनुशासन जरूरी है व उनकी हर पल निगरानी होती है क्‍योंकि हर कार में कैमरे होते हैं जिनकी रिकार्डिंग होती रहती हैद्व इसके अलावा सडक पर आम कारों में खुफिया पुलिस वाले होते हैं, कहीं कायदा तोडा कि ना जाने किस कार पर सायरन बजने लगे व ड्रायवर धर लिया जाए . व्‍यवस्‍था अच्‍छी लगी, काश दिल्‍ली में इस तरह का ्रपयोग हो, कोई एक दशक पहले इंदौर में कलेक्‍टर ने मेट्रो टैक्‍सी के नाम से ऐसी सर्विस शुरू की थी, फिर उसकी दुर्गति हुई जब उसका जिम्‍मा नगर निगम के पास चला गया .
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